थेबनीन का प्रमेय
नमस्कार मित्रों। मै विशाल नागर आज आपको थेबनीन का प्रमेय के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान करूंगा।
थेवेनिन का प्रमेय:- परिपथ सिद्धान्त का एक महत्वपूर्ण प्रमेय है। इसे फ्रांस के टेलेग्राफ इंजीनीयर लियों चार्ल्स थेवेनिन (Léon Charles Thévenin (1857–1926)) ने प्रतिपादित किया था।
इसके अनुसार, वोल्टता स्रोत, धारा स्रोत एवं प्रतिरोधकों से निर्मित किसी भी रैखिक परिपथ का इसके किन्हीं दो सिरों (टर्मिनल्स) के बीच व्यवहार एक तुल्य वोल्तता स्रोत Vth एवं तुल्य प्रतिरोधक Rth के श्रेणीक्रम के द्वारा निरूपित किया जा सकता है। यह किसी एक आवृत्ति वाले प्रत्यावर्ती धारा के स्रोत एवं सामान्यीकृत प्रतिबाधा से युक्त परिपथों के लिये भी लागू होता है। इस सिद्धान्त की खोज सबसे पहले जर्मनी के वैज्ञानिक हर्मन वॉन हेल्मोल्ट्ज (Hermann von Helmholtz) ने सन् १८५३ में की थी किन्तु बाद में थेवेनिन ने सन् १८८३ में इसे 'पुन: खोजा'
पहला चरण:-तुल्य आउटपुट की गणना
Example:-
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| Step:- मूल परिपथ |
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| दूसरा चरण:- तुल्य प्रतिरोध की गणना |
तीसरा चरण:- थेबनिन तुल्य प्रतिरोध
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Nyc
ReplyDeleteIt's good for me
ReplyDeleteRead it
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