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Showing posts from March, 2020

लेन्ज का नियम

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नमस्कार मित्रो आज मै विशाल नागर आपको बसिक्स ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग  के एक टॉपिक लेन्ज नियम के बारे में बिस्तर पूर्वक जानकारी दूंगा! लेेंज के नियमानुसार:    " प्रेरित धारा की दिशा सदा ऐसी होती है जो उस कारण का विरोध करती है जिससे वह स्वयं उत्पन्न होती है।" इस नियम का प्रतिपादन सन् 1833 में हिनरिक लेंज (Heinrich Lenz) ने किया था। उदहारण के लिए यदि हम एक चुम्बक के उत्तरी ध्रुव को किसी कुण्डली के समीप लाये तो कुण्डली में प्रेरित धारा की दिशा इस प्रकार होती है कि कुण्डली का वह सीरा जो चुम्बक के ओर है उत्तरी ध्रुव बन जाता है अर्थात इधर से देखने पर धारा वामावर्त प्रवाहित होती है । उत्तरी ध्रुव बन जाने से यह सीरा आने वाले चुम्बक के प्रतिकर्षण बल लगता है। यह प्रतिकर्षण बल बल ही चुम्बक की गति (पास आने) का विरोध करता है। अब यदि हम चुम्बक को कुंडली से दूर ले जाए तो कुण्डली में प्रेरित धारा की दिशा बदल जाती है तथा कुंडली का चुम्बक के पास वाला सीरा दक्षीणी ध्रुव बन जाता है जो चुम्बक को अपनी ओर आकर्षित करता है अतः चुम्बक की गति का पु▢नः विरोध होता है। ...

थेबनीन का प्रमेय

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नमस्कार मित्रों। मै विशाल नागर  आज आपको थेबनीन का प्रमेय के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान करूंगा। थेवेनिन का प्रमेय:- परिपथ  सिद्धान्त का एक महत्वपूर्ण प्रमेय है। इसे फ्रांस के टेलेग्राफ इंजीनीयर लियों चार्ल्स थेवेनिन (Léon Charles Thév enin (1857–1926)) ने प्रतिपादित किया था। इसके अनुसार, वोल्टता स्रोत, धारा स्रोत एवं प्रतिरोधकों से निर्मित किसी भी रैखिक परिपथ का इसके किन्हीं दो सिरों (टर्मिनल्स) के बीच व्यवहार एक तुल्य वोल्तता स्रोत Vth एवं तुल्य प्रतिरोधक Rth के श्रेणीक्रम के द्वारा निरूपित किया जा सकता है। यह किसी एक आवृत्ति वाले प्रत्यावर्ती धारा के स्रोत एवं सामान्यीकृत प्रतिबाधा से युक्त परिपथों के लिये भी लागू होता है। इस सिद्धान्त की खोज सबसे पहले जर्मनी के वैज्ञानिक हर्मन वॉन हेल्मोल्ट्ज (Hermann von Helmholtz) ने सन् १८५३ में की थी किन्तु बाद में थेवेनिन ने सन् १८८३ में इसे 'पुन: खोजा'   Example:- Step:- मूल परिपथ   पहला चरण:-तुल्य आउटपुट की गणना दूसरा चरण:- तुल्य प्रतिरोध की गणना   तीसरा चरण:- थेबनिन तुल्...